Thursday, April 26, 2012

अमीरी की तो ऐसी की, कि अपना घर लुटा बैठे ,
फकीरी की तो ऐसी की, कि उस के घरमे जा बैठे...

तुम्हें हम कम समझते हैं

"ग़मों को आबरू अपनी ख़ुशी को गम समझते हैं ,
जिन्हें कोई नहीं समझा उन्हें बस हम समझते हैं,
कशिश ज़िन्दा है अपनी चाहतों में जान ए जाँ क्यूँकी ,
हमें तुम कम समझती हो तुम्हें हम कम समझते हैं ....."

General

आसमा को क्या ख़बर दुश्वारियाँ क्या थीं ,
इक सितारा दूंढ़ने में दिन निकल आया

तुम गज़ल बन गई, गीत में ढल गई,मंच से मै तुम्हे गुनगुनाता रहा

ज़िन्दगी के सभी रास्ते एक थे ,सबकी मंज़िल तुम्हारे चयन तक रही,
अप्रकाशित रहे पीर के उपनिषद् ,मन की गोपन कथाएँ नयन तक रहीं ,
प्राण के प्रश्न पर प्रीति की अल्पना,तुम मिटाती रहीं मै बनाता रहा,
तुम गज़ल बन गई, गीत में ढल गई,मंच से मै तुम्हे गुनगुनाता रहा....

Saturday, December 10, 2011

Chand Maddham hai, Asman chup hai,
Neend ki God main, Ye jahaan chup hai,

Door Vadiyon main, Doodhiya Badal chup ke parwaton ko pyar karte hain.
Dil main nakaam hasratein lekar, hum tera intezaar karte hain.

Isse pehle ki, roj ki tarah aj bhi taare, Subah ki gard main kho jayein,
Aa, Ki tere intezaar main jagti ankhein, Kam se kam ik baar to so jayein..
Roj Taaron Ki Numaish Main Khalal Padta hai,
Chand Pagal Hai Andhere Main Nikal Padta Hai.

Tuesday, October 4, 2011

O kalpavraksha ki Sonjuhi

ओ कल्पवृक्ष की सोनजुही!
ओ अमलताश की अमलकली
धरती के आतप से जलते
मन पर छाई निर्मल बदली.
मैं तुमको मधुसदगन्ध युक्त संसार नहीं दे पाऊँगा
तुम मुझको करना माफ तुम्हे मैं प्यार नहीं दे पाऊँगा
तुम कल्पव्रक्ष का फूल और
मैं धरती का अदना गायक
तुम जीवन के उपभोग योग्य
मैं नहीं स्वयं अपने लायक
तुम नहीं अधूरी गजल शुभे
तुम शाम गान सी पावन हो
हिम शिखरों पर सहसा कौंधी
बिजुरी सी तुम मनभावन हो.
इसलिये व्यर्थ शब्दों वाला व्यापार नहीं दे पाऊँगा
तुम मुझको करना माफ तुम्हे मैं प्यार नहीं दे पाऊँगा.

तुम जिस शय्या पर शयन करो
वह क्षीर सिन्धु सी पावन हो
जिस आँगन की हो मौलश्री
वह आँगन क्या व्रन्दावन हो
जिन अधरों का चुम्बन पाओ
वे अधर नहीं गंगातट हों
जिसकी छाया बन साथ रहो
वह व्यक्ति नहीं वंशीवट हो
पर मैं वट जैसा सघन छाँह विस्तार नहीं दे पाऊँगा
तुम मुझको करना माफ तुम्हे मैं प्यार नहीं दे पाऊँगा.

मै तुमको चाँद सितारों का
सौंपू उपहार भला कैसे
मैं यायावर बंजारा साँधू
सुर श्रंगार भला कैसे
मै जीवन के प्रश्नों से नाता तोड तुम्हारे साथ शुभे
बारूद बिछी धरती पर कर लूँ
दो पल प्यार भला कैसे
इसलिये विवष हर आँसू को सत्कार नहीं दे पाऊँगा
तुम मुझको करना माफ तुम्हे मैं प्यार नहीं दे पाऊँगा.